Monday, June 1, 2020

Bahreliya बहरेलिया सिसोदिया राजपूत इतिहास

                                  इतिहास
           
बहरेलिया_सिसोदिया_राजपूत

बहरेलिया सिसोदिया वंस शुद्ध क्षत्रिय राजपूत राजवंश है।

राजस्थान मे चित्तौडगढ़ से 36 मील पश्चिम मै स्थित सिसोदय गाँव के सिसोदिया वंशज के ब्रहम सिंह और बलराम सिंह निवासी थै। और राजस्थान कन्नौज के रिसालदार सेनापति थे ब्रहम सिंह ने अपने बडे पुत्र को भी उच्च पद पर सेना मे डाल रखा था। इनको  युध्द मै राजस्थान कन्नौज मै भेजा गया था और उनकी वहा विजय हुयी थी। इसके बाद इनको शाही आदेश मिला की उत्तर प्रदेश के सूरजपुर बहरेला बाराबंकी के राजा जोर खाँ,आदिल खाँ,अवर खाँ पठान कई वर्षो से मालगुजारी नही दे रहे है। तो वहा जाकर उससे मालगुजारी वसूली जाए यदि वह मालगुजारी देने से मना करता है तो उससे सूरजपुर बहरेला छीन लिया जाए।
इस आदेशानुसार बलराम सिंह सेना लेकर सूरजपुर बहरेला गये वहा जाकर पठान से मालगुजारी की बात करी तो उसने मालगुजारी देने से मना कर दिया और विद्रोह कर दिया तो बलराम सिंह ने उससे युध्द किया और उसको मार दिया उस युध्द मे बलराम सिंह  की विजय हुई  लेकीन बलराम सिंह की एक ही लडकी थी इसलिये उन्होने अपने बडे भाई ब्रहम सिंह को सूरजपुर बहरेला का प्रथम राजा बनाया और इसलिये सूरजपुर बहरेला मै राज्य करने से इनको (''बहरेलिया'') की उपाधि मिली
ब्रहम सिंह के मरने के बाद इनके लडके पुरन सिंह जो बडे थै। और राज्य के अधिकारी थे और शाही फौज मे सेना नायक थे समह को देखते सेना मे रहना उचित समझ राजा अपने छोटे भाई भिकम सिंह को राजा बनाया और कहा की जब मे शाही सेना से निव्रत्त होके आऊंगा तो अपना राज्य वापस ले लूंगा। पुरन सिंह के आने पर भिकम सिंह ने उनका अपना राज्य का हिस्सा तो दिया लेकीन राजगद्दी नही छोड़ी इस प्रकार भिकम सिंह के वंशजो मे रामपुर,भीकरपुर-टिकरा आदि तथा पुरन सिंह के वंशजो मे नैपुरा,किठेयया आदि ताल्लुक बने।
किठेयया ताल्लुक के लोगो का पुरन सिंह के वंशज होने का प्रमाण इस बात से सिध्द होता है की भिकम सिंह के वंशजो मे सूरजपुर की रानी गुलाब कुँवरि थी जो एक बार पूजा अर्चना हेतू श्री भैरवनाथ के मन्दिर मऊ गयी थी। और वह काफी सुन्दर थी लखनऊ के नवाब पठान ने उन्हे अपहरण करने की योजनानुशार अपनी सेना के साथ घेर लिया रानी के साथ कुछ ही सेना के सिपाही थे सिपाही सारे मारे गये रानी ने अपनी रक्षा करने हेतू कटारी मार कर मन्दिर के अन्दर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद जब सूरजपुर राजा को पता चला तो उन्होने नवाब पठान को मार डाला इसके बाद भिकम सिंह के वंशज श्री भैरवनाथ मन्दिर मे चड़ा हूआ प्रशाद इसलिये नही खाते है की श्री भैरवनाथ जी ने रानी की रक्षा नही कर सके तथा नेपुरा और किठेयया ताल्लुक के लोग श्री भैरवनाथ जी का प्रशाद खाते है
भिकम सिंह के वंशजो के ताल्लुक बनने की बात इस प्रकार है
श्री ब्रहम सिंह के उनकी ग्याहरवी पीढी मे राणा गणपति सिंह हुए

इनके चार लडके (1) धारु सिंह (2) फतेह सिंह (3) मधुकर सिंह (4) दयाल सिंह हुए। जिनमे धारु सिंह राजा हुए और फतेह सिंह को नव  गाँव सहित रामपुर, मधुकर सिंह को सात गाँव सहित भिकरपुर, दयाल सिंह को पाँच गाँव सहित टिकरा आदि का ताल्लुक दिया गया

(1) रामपुर ताल्लुक मे रामपुर-अलादासपुर-भानपुर-बाजपुर- इब्राहिमबाद आदि।

(2) भिकरपुर ताल्लुक मे भिकरपुर-बहरेला-तिवारीपुर-कसिर्पुर-निस्कापुर-बांसपुर कसैटा गाँव,खरिका,बाजपुर, ख्वाजापुर आदि।

(3) इसके बाद ब्रहम सिंह के बाद सोल्हवे राजा श्री लछम्ण सिंह हुए जिनके दो पुत्र फतेह सिंह तथा अवधूत सिंह हुए जिनमे फतेह सिंह राजा हुए और अवधूत सिंह को रतोली सहित पाँच गाँव मिले (1)रतोली (2) जोड़ (3)बबुरि गाँव (4) अमहिया (5) सलेमपुर आदि दिया गया।

इसके बाद ब्रहम सिंह के सत्रहवे राजा फतेह सिंह हुए जिनके तीन लडके (1) गुरूदत्त सिंह (सिंह जू) (2) दुर्गा सिंह (3) ईशवरी सिंह हुए
जिनमे गुरूदत्त सिंह (सिंह जू) राजा हुए और शेष दो लड़को को हाथोंधा आदि पाँच गाँव गुजारे मे दिये गये

यहां शासन के कारण सिसोदिया को बहरेलिया सिसोदिया की उपाधि मिली थी....

ओर सिसोदिया राजपूतो द्वारा सूरजपुर बहरेला बाराबंकी पर शासन करने के कारण उनको बहरेलिया सिसोदिया राजपूत कहा जाने लगा...

बहरेलिया सिसोदिया वंस एक शुद्ध सूर्यवंशी क्षत्रिय राजपूत राजवंस है जो अब वर्तमान मे उत्तर प्रदेश के कई जिलो मै है जेसे सुल्तानपुर,प्रतापगढ़ अमेठी रायबरेली फैजाबाद ओर भी कई सब को बहरेलिया सिसोदिया कहा जाता है।

बहरेलिया सिसोदिया राजपूत विवाह सम्भंध।
ये अपनी कन्या वत्सगोत्री, राजकुमार,रजवार,बन्धलगोत्री,कन्हपुरिया,अमेठया,पुणता के इटौंजा और कभी-कभी तिलोकचंद बैस को देते है
ओर रघुबंसियों, रायपट्टी के बिसेन, चौहान
रेकवार,बरवार,जनवार,,पलवार ओर बैस से कन्या लेते है।

रघुबंसियों, रायपट्टी के बिसेन, चौहान और बैस से शादी करते हैं,  अमेठी, पुणता के इटौंजा और कभी-कभी तिलोकचंद बैस से होती है।

सिसोदिया वंशी बहरेलिया राजपूतो के राज्य स्थापित होने के बाद सूरजपुर राज्य मे निम्नांकित राजा हूए-
(1)राजा श्री बलराम सिंह सिसोदिया
(2)राजा श्री ब्रम्ह सिंह सिसोदिया
(2)राजा श्री भिकम सिंह सिसोदिया
(3)राजा श्री मुरारी सिंह सिसोदिया
(4)राजा श्री धरम बहादुर सिंह सिसोदिया
(5)राजा श्री तेज सिंह सिसोदिया
(6)राजा श्री शक्ति सिंह सिसोदिया
(7)राजा श्री जय चंद्र सिंह सिसोदिया
(8)राजा श्री अमान सिंह सिसोदिया
(9)राजा श्री वासुदेव सिंह सिसोदिया
(10)राजा श्री दूल्हे सिंह सिसोदिया
(11)राजा श्री गणपति सिंह सिसोदिया
(12)राजा श्री धारु सिंह सिसोदिया
(13)राजा श्री लाल सिंह सिसोदिया
(14)राजा श्री दल सिंह सिसोदिया
(15)राजा श्री देवी सिंह सिसोदिया
(16)राजा श्री लछमण  सिंह सिसोदिया
(17)राजा श्री फतेह सिंह सिसोदिया
(18)राजा श्री गुरुदत्त सिंह सिसोदिया उर्फ (सिंह जू)
(19)राजा श्री उदत्त प्रताप सिंह सिसोदिया
(20)राजा श्री महिपाल सिंह सिसोदिया
(21)राजा श्री पृथ्वीपाल सिंह सिसोदिया
(22)राजा श्री ईश्वरी सिंह सिसोदिया
(23)राजा श्री महेंद्र प्रताप सिंह सिसोदिया
(24)राजा श्री दान बहादुर सिंह सिसोदिया

डकेत भी बहुत हूए बहरेलिया सिसोदिया राजपूत के जेसे
(1)श्योडिन सिंह बहरेलिया
(2) चंदा सिंह बहरेलिया
(3) इंदल सिंह बहरेलिया
(4)जनक सिंह बहरेलिया
(5)जसकरन सिंह बहरेलिया
(6)रघुबर सिंह बहरेलिया
(7) मुरत सिंह बहरेलिया
(8) भवानीपुर का महीपत सिंह बहरेलिया सबसे खतरनाक डाकू था
ग्यारह गाँवों की एक संपत्ति, सभी इस कबीले के लुटेरों के कब्जे में हैं।ओर भी बहुत ड्केत हुये।

इनके राज्य मै एक ऐशा वक्त आया की सब इधर उधर हो गया

जब राजा गुरूदत्त सिंह (सिंह जू) सूरजपुर बहरेला के महाराजा थे।

सूरजपुर के राजा सिंहजी बहुत ही दुर्जेय थे, जिन्होंने सरकारी अधिकारियों का सफलतापूर्वक विरोध किया। उनकी कहानी सर डब्ल्यू स्लीमैन द्वारा बताई गई है। यह मुख्य रूप से उनके बुरे उदाहरण के कारण था कि दरियाबाद जिला अशांति और अव्यवस्था का ऐसा आकर्षण बन गया था कि चकलाघर एक देशी अभिव्यक्ति का उपयोग करने में असमर्थ थे-इसमें सांस लेने में असमर्थ थे। उन्होंने न केवल थोक लूट और, बल्कि उन्होंने  कई बहरेलिया डाकुओं को भी प्रोत्साहित किया, जैसे कि श्योडिन सिंह, उनके चचेरे भाई, चंदा सिंह और इंदल सिंह, जिनमें से अधिकांश लखनऊ की जेल में मारे गए; सूरजपुर में किटकैया के जनक सिंह और जसकरन सिंह; और रघुबर सिंह और मुरत सिंह, किताइया, ग्यारह गाँवों की एक संपत्ति, सभी इस कबीले के लुटेरों के कब्जे में हैं। भवानीपुर का महीपत सिंह सबसे खतरनाक डाकू था और सभी गिरोहों का मुखिया भी था। राजा सिंहजी को महाराजा मान सिंह और कैप्टन ओआर, इन चार्जेज ऑफ कंपनीज फ्रंटियर पुलिस द्वारा न्याय के लिए लाया गया था, जिन्होंने 1845 में सूरजपुर के किले पर हमला किया था, बहरेलिया डाकुओं को ढूंड ढूंड कर मारा जा रहा था। राजा गौरा के किले मे थे, जहाँ उसने आत्मसमर्पण किया; उन्हें लखनऊ ले जाया गया और वहाँ जेल में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी अपनी विधवा, रानी लेखराज कुंवर, जो ऊर्जा और संसाधन की एक उत्कृष्ट महिला थीं, उन्होने सनद हासिल किया। जिसने राम सनेही घाट तहसील के इस तालुका के मुख्यालय के रूप में चामियरगंज का निर्माण किया था। उनकी मृत्यु के समय, संपत्ति राजा उदित परताब सिंह के हाथों में चली गई, जो अपने नाना, उदित नारायण द्वारा नियंत्रित संपत्ति का प्रबंधन करने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से अयोग्य थे। फिर सनद राजा सिंहजी के चचेरे भाई बाबू महिपाल सिंह के पास आया। उनकी मृत्यु के समय बाबू पीरथिपाल सिंह के अल्पसंख्यक होने के दौरान कोर्ट ऑफ वार्ड्स के प्रबंधन के तहत संपत्ति ले ली गई थी, जिसे बाद में 52 गांवों के साथ सनद मिला। उन्होंने लखनऊ के कॉल्विन स्कूल और आगरा कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की थी। उनका निवास चामियरगंज के उत्तर-पश्चिम में लगभग पांच मील और कल्याणी नदी के पास परगना के उत्तर में एक गाँव हतौंडा में था। कोई अन्य बहरेलिया तालुकदार नहीं है, और केवल दो सदस्य हैं,। एक सुल्तानपुर जिले के पाली के बाबूयन भगवान कुंवर हैं, जो परगना मवई में गुमटी के किनारे, अमीरों के एकल गांव के मालिक हैं। 2175। इस संपत्ति का हिसाब सुल्तानपुर खंड में दिया गया। दूसरा रायबरेली के पनाहना का तालुकदार था, जिसमें परगना, सुबेहा और इनहौना तीन गाँव शामिल थे, जिनका मूल्यांकन रु। 1,530. संपदा को सराय-गोपी के नाम से भी जाना जाता था। गौमहा परिवार के श्योराण सिंह थे। वह रायबरेली जिले में रहता था। गौहा का संबंध गांडीओ बैस से है, जिसने आरंभिक तिथि में इंहौना परगना को उपनिवेशित किया।
 अपने परिवारों के साथ बहुत सारे बहरेलिया, महोना के कैप्टन ओर और राजा मान सिंह के शिकार के कारण तालुका छोड़ गए, और सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और रायबरेली में बस गए। ईश्वरी सिंह बहरेलिया को नौरंगाबाद जो कि गोमती नदी के पास है, तिरहुत (राम नगर) के राजा बद्री प्रताप सिंह ने दिया थ। जिसका उल्लेख सुल्तानपुर 1903 के गेज़ेट्टर में किया गया है। रामाधीन सिंह बहरेलिया  को हसनपुर के राजा से 500 एकड़ ज़मीन और 3 गाँव दिए गए थे। क्षत्रिय महासभा की किताब, 1913 में दिया गया है। अपने परिवारों के साथ बहुत सारे बहरेलिया, महोना के कैप्टन ओर और राजा मान सिंह के शिकार के कारण तालुका छोड़ गए, और सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और रायबरेली में बस गए।
प्रतापगढ़ के अधिकांश बहरेलिया राजाओं और जमींदारों के अलग-अलग तालुकों में काम मिल गया । जब वे इन जिलों में आए, तो उनको लोगो ने राजपूत नही समझा
जो 1850 से पहले के रहने वाले बहेलिया चिड़िमार इन जिलों में रह रहे थे।उन्होने बहरेलिया नाम का फाएदा उठाकर वो भी बहेलिया ठाकुर या राजपूत नाम के आगे लिखने लगे।
कुछ जगह बहरेलिया राजपूतो की ल
 अन्य राजपूतों के साथ लडाई हो गयी । जोश और उनके रौबदार स्वभाव के कारण लोग उन्हें बहेलिया (एक अनुसूचित जाति) कहकर चिढ़ाने लगे। कुछ बर्ताव ठाकुर या राजपूत की वजह से हुए,

ओर जो बहरेलिया सिसोदिया राजपूत थे वो लोगों को यह बताने में सक्षम नहीं थे कि उनके खिलाफ लूट का मामला होने के कारण वो अपना सूरजपुर बहरेला बाराबंकी छोडकर यहा आये है। वो बाराबंकी के बहरेलिया सिसोदिया राजपूत है।

हर पुरानी क्षत्रिय या राजपूत वंशावली जैसे ठाकुर ईश्वर सिंह माधव की राजपूत वंशावली, ठाकुर बहादुर सिंह बीरदास की राजपूत वंशावली, और श्री रघुनाथ सिंह कालहदहि के राजवंश आदि बहरेलिया सिसोदिया का उल्लेख है: -
गोत्र - भारद्वाज, वंश - बैस की गोद (सिसोदिया),
मुलवंस - सूर्यवंश,- वेद - यजुर्वेद,-उपवेद -धनुर्वेद,
कुलदेवी - बाणेश्वरी (बाणमाता), कुलदेव - शिव जी,
सूत्र - कात्यायन,- ऋषी -वशिष्ठ,- शाख - माध्यंन्दिनी, प्रवर - वशिष्ठ,- शिखा - दोहिन,- पाद - दाहिन,
देवता -कात्यायन,-शाखा -बहरोलिया
 तालुका - सूरजपुर बहरेला , जिला - बाराबंकी और रायबरेली (अब सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और फैजाबाद में भी)